पवित्र बाइबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर) तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की।
पवित्र बाइबल में प्रमाण है कि प्रभु मानव सदृश है, साकार है। जबकि ईसाई धर्म के व्यक्ति परमात्मा को निराकार कहते हैं।
पवित्र बाइबल में प्रमाण है प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं। माँस खाने का आदेश नहीं है परमेश्वर का।
बाइबल में प्रमाण है कि कबीर साहिब ही परमेश्वर हैं। (Orthodox jewish bible iyov 36:5) उन्होंने ही छः दिन में सृष्टि रचना की और सातवें दिन तख़्त पर जा विराजे।
"हजरत ईसा जी को पूर्ण परमात्मा सत्यलोक से आकर मिले तथा एक परमेश्वर का मार्ग समझाया। इसके बाद ईसा जी एक ईश्वर की भक्ति समझाने लगे। लोगों ने बहुत विरोध किया।
फिर भी वे अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए। ब्रह्म(काल) के फरिश्ते हजरत ईसा जी को विचलित करते रहे तथा वास्तविक ज्ञान को दूर रखा।" - सतगुरु रामपालजी महाराज
पवित्र बाइबल में प्रमाण है कि प्रभु मानव सदृश है, साकार है। जबकि ईसाई धर्म के व्यक्ति परमात्मा को निराकार कहते हैं।
हजरत यीशु का जन्म तथा मृत्यु व जो भी चमत्कार किए वे पहले ही ब्रह्म के द्वारा निर्धारित थे। ताकि उसके भेजे अवतार की महिमा बानी रहे। और जब परमेश्वर का संदेशवाहक आये तो कोई उसका विश्वास न करे।
हजरत ईसा मसीह की मृत्यु पूर्व ही निर्धारित थी। स्वयं ईसा जी ने कहा कि मेरी मृत्यु निकट है तथा बारह शिष्यों में से ही एक मुझे विरोधियों को पकड़ाएगा।
ईसा जी की मृत्यु असहनीय पीड़ा से हुई। जबकि पूर्ण परमात्मा न तो मां से जन्म लेता है और न ही उनकी मृत्यु होती है।
"पूर्ण परमात्मा ने ही ईसा जी की मृत्यु के पश्चात् ईसा जी का रूप धारण करके प्रकट होकर ईसाईयों के विश्वास को प्रभु भक्ति पर दृढ़ रखा, नहीं तो ईसा जी के पूर्व चमत्कारों को देखते हुए ईसा जी का अंत देखकर कोई भी व्यक्ति भक्ति साधना नहीं करता, नास्तिक हो जाते।" - सतगुरु रामपालजी महाराज
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